अन्नदाता को तोहफा

0
13

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा खरीफ फसलों के लिए न्यूतनम समर्थन मूल्यों में वृद्धि स्वागत योग्य है। भाजपा ने 2014 के आम चुनाव के अपने घोषणा पत्र में यह वायदा किया था कि सत्ता में आने पर वह फसल की लागत का डेढ़ गुणा मूल्य किसानों को देगी। यूपीए शासनकाल में गठित एमएस स्वामीनाथन आयोग ने इसकी अनुशंसा की थी, लेकिन उस दौरान इसे अमल में नहीं लाया गया। मोदी सरकार भी हर फसल के पूर्व मूल्यों में थोड़ी वृद्धि कर रही थी, लेकिन इस बार के बजट में डेढ़ गुणा मूल्य देने की घोषणा की गई। उसके अनुसार रबी की फसलों का दाम बढ़ाया गया और अब खरीफ का। हालांकि विपक्षी दल इसकी भी आलोचना कर रहे हैं, मगर उसे राजनीतिक बयान से ज्यादा महत्त्व नहीं दिया जा सकता है। कई किसान संगठनों ने भी सरकार द्वारा वृद्धि को अपर्याप्त कहा है। वस्तुत: किसान संगठन लागत तय करने का आधार बदलना चाहते हैं। इसमें एक श्रेणी होती है सी 2। इसमें अन्य प्रत्यक्ष लागत के साथ भूमि का मूल्य, परिवार के लोगों के श्रम का पारिश्रमिक आदि शामिल करके गणना होती है। यह एक मांग है, जिस पर किसान संगठन बने रहेंगे। सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति के तहत यह रवैया स्वाभाविक है। पर मूल्य वृद्धि निराशाजनक नहीं है। अभी जो लागत मूल्य का सूत्र है, उसके अनुसार यह डेढ़ गुणा वृद्धि है। इस नाते इसका समर्थन करने में कोई हर्ज नहीं है। किसानों को थोड़ा और ज्यादा मिले इसके लिए दबाव बनाए रखा जाए। पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने किसानों से मोदी एप पर बात की। उसके बाद देश भर से आए किसानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी बातें सुनीं। उसके बाद पहले गन्ना किसानों के लिए और अब सभी किसानों के लिए यह घोषणा हुई है। किसानों की समस्या खेती की लागत में वृद्धि है। इसे कैसे कम किया जाए इस पर ज्यादा फोकस किए जाने की आवश्यकता है। अगर लागत कम हो जाए तो न्यूनतम समर्थन मूल्य में सरकार की देयता भी घट जाएगी और किसानों की परेशानियां भी कम होंगी। फसल के मूल्य बढ़ने का एक नकारात्मक असर महंगाई बढ़ने के रूप में भी आता है। खाद्यान्नों के दाम ज्यादा दिए जाएंगे तो बाजार में वह महंगा होगा ही। उसके बाद महंगाई बढ़ने का रोना आरंभ हो जाता है। यह समझना चाहिए कि किसानों को अगर उनकी पैदावार का उचित मूल्य देना है तो हमें थोड़ी महंगाई को बोझ सिर पर उठाना ही होगा।

यह भी पढ़े  जितना दल-दल उतना खिलेगा कमल : नमो

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here