अनुच्छेद 370 पर पाकिस्तान हुआ पस्त,अब अल्‍लाह की शरण में, पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर कही ये बात

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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने की कवायद में जुटा है लेकिन उसे उम्मीद के मुताबिक कामयाबी मिलती नहीं दिख रही। अब यह बात पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में कोई हार लेकर नहीं खड़ा है और इसके लिए हमें खासा संघर्ष करना पड़ेगा। अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद से लगातार हाथ-पांव मार रहे पाकिस्‍तान का अब लगता है सच से सामना हो गया है. इसलिए अब वह अल्‍लाह की शरण में पहुंच गया है. कुरैशी का अब कहना है, ‘अल्लाह की लाठी में आवाज नहीं होती. अगर वह चल गई तो मोदी का गरूर खाक में मिल जाएगा.’ पाकिस्तानी पत्रकारों से बातचीत करते हुए कुरैशी ने कहा, “पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाने का फैसला किया है. इससे पहले कि हम मुद्दा उठाएं, हमारी आवाज वहां तक पहुंचनी चाहिए. अगर हम एकजुट नहीं हुए तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा.”

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कुरैशी ने यह भी कहा, “कुछ लापरवाहियों ने पाकिस्तान को इस मामले में दशकों पीछे धकेल दिया है, लेकिन अब आगे बढ़ने का समय है. दुनिया को पता चलना चाहिए कि कश्मीरी क्या चाहते हैं. जिस दिन मोदी संयुक्त राष्ट्र आम सभा के लिए जाएं, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करना होगा, विश्व बिरादरी को चिट्ठी लिखनी होगी, आवाज उठानी होगी. हमें अपनी लड़ाई भरपूर तरीके से लड़नी होगी.”

शाह महमूद कुरेशी ने आगे कहा, ‘’संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के स्‍थायी सदस्‍यों के भी निजी हित भारत से हैं और उन्‍होंने वहां पर अरबों का निवेश किया हुआ है। ऐसे में वह पाकिस्‍तान का साथ देंगे यह बेहद मुश्किल है।’’ हालांकि उन्होंने कहा कि देश कश्मीरियों के मुद्दे पर हर मंच पर लड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपना स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) कश्मीर से जोड़ा है. हम भारत के स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को काला दिवस के रूप में मनाएंगे. कुरैशी ने दावा किया कि कश्मीर मामले में चीन का रुख पाकिस्तान के पक्ष में है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य नहीं है. ऐसे में पाकिस्तान का पक्ष वहां चीन रखेगा. चीन सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान का वकील होगा.

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इससे पहले शाह महमूद कुरैशी ने कहा था, “पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की, लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी. दुनिया के किसी भी देश ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया. पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कुरैशी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) में भी हमें समर्थन मिलना मुश्किल है. कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तानी और कश्मीरियों को यह जानना चाहिए कि कोई आपके लिए नहीं खड़ा है. हमें मूर्खों के स्वर्ग में नहीं रहना चाहिए. आपको संघर्ष करना होगा.

गत सप्ताह संसद की एक संयुक्त बैठक में भारत के खिलाफ प्रस्ताव की भाषा को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद उत्पन्न हो गए थे। कुरैशी ने कहा कि भारत द्वारा कश्मीर का विशेष दर्जा एकतरफा समाप्त करने से कश्मीरियों के पास इसके खिलाफ खड़े होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। भारत ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर खंडों को समाप्त करना उसका आंतरिक मामला है।

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गिलगिट-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने के बारे में एक सवाल पर कुरैशी ने कहा कि ऐसा करने से कश्मीर उद्देश्य और पाकिस्तान के रुख को नुकसान होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इस पर कैबिनेट में चर्चा की गई थी क्योंकि इसकी काफी मांग उठी है लेकिन हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे कश्मीर पर हमारी विधिक स्थिति को नुकसान पहुंचे।’’

इससे पहले कुरैशी ने कश्मीरियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए मुजफ्फराबाद में ईद की नमाज अदा की। कुरैशी ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान 14 अगस्त को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का दौरा करेंगे और उसकी विधानसभा को संबोधित भी करेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने का निर्णय किया है और चीन ने इस उद्देश्य के लिए पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है।

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