अधूरे रह गये कई दिग्गज कांग्रेसियों के ख्वाब

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रैली के बाद उत्साह से लबरेज कई दिग्गज कांग्रेसियों का संसद में जाने का ख्वाब धर रह गया। ख्वाब ऐसा टूटा कि वे अब बोलने की स्थिति में भी नहीं हैं। सारा खेल गठबंधन ने बिगाड़ा है। अब वे पानी पी-पी कर राजद प्रमुख लालू यादव को कोस रहे हैं। औरंगाबाद के शेर माने जाने वाले निखिल कुमार की स्थिति जो हुई किसी से छिपी नहीं है। निखिल कुमार ने ही संकेत में कल सब कुछ बयां कर दिया। खेल कहीं अपनों ने तो नहीं बिगाड़ा, तहकीकात शुरू है! अखिलेश, मदन मोहन और गोहिल कटघड़े में खड़े हैं। चाहत की बात की जाये तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा भी इसी लाईन में खड़े थे। नवादा सीट की चाहत थी। कांग्रेस के हर कार्यक्रम को लेकर नवादा में खूब झंडा फहराया। नतीजा सिफर निकला। सीट राजद के झोली में चली गयी। टिकट भी मिला तो नामी राजबल्लभ यादव की पत्नी को। पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद सिंह भी मने मन औरंगाबाद से निखिल बाबू का टिकट कटवा कर खुद मैदान मारने की जुगत में थे। लेकिन माया मिली न राम वाली कहावत चरितार्थ हुई। कभी सुर्खियों में रहे ब्रजेश पांडेय बाल्मीकीनगर, ई.संजीव मुजफ्फरपुर और पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी का किशनगंज से चुनाव लड़ने का सपना अधूरा रह गया। इसी तरह पूर्व विधायक जर्नादन शर्मा की पाटलिपुत्र से, विधायक पूनम पासवान की हाजीपुर से, श्याम सुन्दर सिंह धीरज की मुंगेर से तथा बंटी चौधरी की जमुई से लोकसभा पहुंचने की चाहत अधूरी रह गयी। सांसद और जाप संरक्षक पप्पू यादव को कांग्रेस से नजदीकियों का सिला अच्छा नहीं मिला। कांग्रेस से टिकट की चाह पप्पू यादव की अधूरी रह गई। माना जा रहा है कि तेजस्वी की जिद के आगे कांग्रेस ने पप्पू यादव से दूरी बना ली। लेकिन पप्पू यादव ने भी अब एलान कर दिया है कि वे मधेपुरा से उम्मीदवार होंगे। उन्होंने कहा है कि मुझे कोई अपनी मिट्टी, मां, मेरे भगवान कोसी की आवाम से दूर नहीं कर सकता। संविधान और लोकतंत्र बचाने के लिए बारह दिनों से मैं बहुत अपमान झेल रहा हूं। 28 मार्च को मधेपुरा से अपनी उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल करूंगा। कांग्रेस में आखिर किसकी चल रही है? यह सवाल सब के जुबान पर है। कहा तो जा रहा है कि कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति के चेयरमैन अखिलेश प्रसाद सिंह की भूमिका सबसे ज्यादा है। बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी उनके साथ हो गये हैं। महागठबंधन में शामिल होने को लेकर लालू से तार जोड़ने में अहम रोल रहा है। अखिलेश फिलहाल महाराजगंज से विमलकीर्ति सिंह और मोतिहारी से अपने पुत्र आकाश सिंह या पत्नी वीणा देवी को कांग्रेस से टिकट दिलाने के अभियान में हैं। विमलकीर्ति सिंह कभी अखिलेश सिंह के पीए रह चुके हैं जब वे केन्द्र मेंंमंत्री थे। इस कारण वे हर हाल में मोतिहारी और महराजगंज की सीट को अपने पाले मे रखना चाह रहे हैं। वे इस कोशिश में हैं कि अगर वह सीट कांग्रेस के खाते में गयी तो कांग्रेस से और अगर सहयोगी दल के खाते में गयी तो सहयोगी पार्टी के टिकट पर बेटे को चुनाव लड़वाया जाए। इसको लेकर राजद खेमे में बगावत के सुर देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस का हाथ थामने वाले कीर्ति आजाद को महागठबंधन ने उनकी सीट दरभंगा से टिकट नहीं दिया है। राजद ने इस सीट से पार्टी के वरीय नेता और मुस्लिम चेहरा अब्दुल बारी सिद्धिकी को टिकट दिया है। इस बात की घोषणा राजद के प्रवक्ता और मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने की है। इसको लेकर भी उछलकूद की स्थिति बनी हुई है।

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