अगले माह गुवाहाटी में सीएम नीतीश कुमार का होगा सार्वजनिक सम्मान

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file photo
पटना : मुख्यमंत्री सह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से मिलने और धन्यवाद देने के लिए असम गण परिषद के शीर्ष नेताओं की टीम 29 सितंबर को पटना पहुंच रही है. असम गण परिषद की आठ सदस्यीय टीम में पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार मोहंता भी शामिल हैं.
नीतीश कुमार ने प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) बिल 2016 के मुद्दे पर असम गण परिषद के स्टैंड का समर्थन किया था. असम गण परिषद ने निर्णय लिया है कि अक्तूबर में गुवाहाटी में नीतीश कुमार का नागरिक अभिनंदन भी किया जायेगा. जदयू के प्रधान महासचिव व राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ असम गण परिषद के नेताओं की बैठक व लंच का कार्यक्रम भी तय किया गया है.
प्रतिनिधिमंडल में असम के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार मोहंता, वर्तमान अध्यक्ष व असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा, कार्यकारी  अध्यक्ष व जल संसाधन मंत्री पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र  प्रसाद वैश्य, खाद्य मंत्री  फनी भूषण चौधरी, विधायक वृंदावन गोस्वामी, रमेंद्र नारायण कलीटा और मंत्री का दर्जा प्राप्त डॉ कमला कांत शामिल रहेंगे. बैठक के दौरान केसी त्यागी भी मौजूद रहेंगे.
इस मुलाकात के दौरान  प्रतिनिधिमंडल के सदस्य  नीतीश कुमार को सम्मानित करने और सार्वजनिक  मंच पर उनका धन्यवाद ज्ञापन करने  के लिए गुवाहाटी आने का न्योता भी देंगे.  महत्वपूर्ण है कि असम गण परिषद तथा जदयू का पुराना संबंध रहा  है. वाजपेयी सरकार में दोनों  दल एक साथ काम कर चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री  प्रफुल्ल कुमार  मोहंता व नीतीश कुमार का भी पुराना  मैत्री संबंध सराहनीय रहा है.
त्यागी ने बताया कि हाल ही में अखिल असम छात्र संघ का प्रतिनिधिमंडल ने नीतीश कुमार से मुलाकात कर नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन के लिए प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) बिल 2016 के संबंध में अपनी चिंताओं से अवगत कराया था. नागरिकता की समस्या को लेकर जदयू कार्यकारिणी में अखिल असम छात्र संघ द्वारा दिये गये मेमोरेंडम पर चर्चा हुई. संशोधन बिल में भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन देने के योग्य बनाने का प्रस्ताव है.
भारत सरकार, अखिल असम छात्र संघ व ऑल असम गण संग्राम परिषद के बीच हुए असम समझौते में यह प्रावधान है कि 25 मार्च, 1971 को या उसके बाद बांग्लादेश से अवैध तरीके से असम में प्रवेश करनेवाले सभी विदेशी, चाहे वे किसी भी धर्म अथवा भाषा के हो, उन्हें चिह्नित कर उनके नाम मतदाता सूची हटा दिया जायेगा. उन्हें कानून के अनुसार देश से निष्कासित कर दिया जायेगा. जदयू ने केंद्र सरकार से नागरिकता संशोधन बिल 2016 के संदर्भ में सभी विवादित मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने और असम के लोगों की आशंकाओं को दूर करने की अपील की थी.
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