अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रखने को पर्यावरण के साथ नहीं करें छेड़छाड़ : नीतीश

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Patna-June.24,2018-Bihar Chief Minister Nitish Kumar is delivering his lecture during East India Climate Change Conclave at Gyan Bhawan in Patna. Photo by – Sonu Kishan.

पटना के ज्ञान भवन में आयोजित ईस्ट इंडिया क्लामेट चेंज कॉन्क्लेव 2018 में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को मिथिला पेंटिंग भेंट करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानना है कि बिहार के तीसरे कृषि रोड मैप में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए उपाय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को बड़ा खतरा बताया और अगली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ नहीं करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने राजधानी के ज्ञान भवन में रविवार को आयोजित ईस्ट इंडिया क्लाइमेट चेंज कॉन्क्लेव-2018 में कहा कि बिहार जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से अवगत है तथा उससे निबटने के प्रयासों पर बल दे रहा है। उन्होंने आास्त किया कि राज्य के तीसरे कृषि रोडमैप (2017-22) में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के उपाय शामिल किये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं सबसे पहले वन एवं पर्यावरण विभाग को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि पूर्वी भारत जलवायु कॉन्क्लेव का आयोजन बिहार में कराया गया और मुझे इसमें शामिल होने का मौका मिला। दो दिनों तक इस विषय पर चलने वाली र्चचा में पर्यावरण को होने वाले नुकसान एवं उसके समाधान के बारे में कुछ निष्कर्ष निकलेगा ऐसी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विास है की आने वाली पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए हमलोग पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि रोडमैप में हर चीज का ख्याल रखा गया है। फसल चक्र पर काम किया जा रहा है। राज्य में राजेंद्र कृषि विविद्यालय, सबौर कृषि विविद्यालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का यहां स्थापित रीजनल केंद्र इन सब चीजों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार पहला ऐसा राज्य है जहां आपदा जोखिम न्यूनीकरण का रोडमैप बना है। मुख्यमंत्री ने गंगा नदी में जमा हो रही गाद की गंभीर समस्या और उसके दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2016 में गंगा नदी से सटे जिलों में बाढ़ आई थी। गंगा नदी का जलस्तर पहले से सभी जगहों पर ऊंचा हो गया है। उन्होंने कहा कि गंगा पवित्र नदी है। इसकी अविरलता एवं निर्मलता दोनों प्रभावित हुई है। इसके लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एवं प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया है। विशेषज्ञों की कमेटी भी बनायी गई है। हाल ही में गंगा जलमार्ग पर बक्सर के पास अप स्ट्रीम में एक काबरेवेसल यान फंस गया और उसे निकालने आनेवाला टैगवेसल 10 किलोमीटर पहले ही फंस गया। रामरेखा घाट के पास गंगा की गहराई मात्र 1.10 मीटर है। गंगा नदी में काई जम गयी है। बेगूसराय के पास तो पानी काला हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बक्सर के पास गंगा में 400 क्यूमेक्स पानी आता है और बिहार की सीमा से 1600 क्यूमेक्स पानी जाता है, यानि बिहार में प्रवेश करने के बाद गंगा से ज्यादा पानी की मात्रा बाहर जाती है। बिहार में बाढ़ बाहर की नदियों से आती है। गंगा के जल के साथ छेड़छाड़ की गयी है। इसमें कई बराज बनाये गये हैं। फरक्का बराज बनने से पानी के साथ जितनी गाद बाहर जानी चाहिए, उतनी नहीं निकल पाती है। गाद निकालने के लिए नदी के प्रवाह को ठीक करना होगा। मुख्यमंत्री ने राज्य में वष्ापात के स्तर में आई कमी पर चिंता व्यक्त की और कहा कि बिहार में वष्ापात का औसत 1200 से 1500 मिलीमीटर के बीच होता था। हाल ही में मौसम विभाग ने इस वर्ष औसत वष्ापात का अनुमान 1027 मिलीमीटर बताया है। यह 30 वर्षो (वर्ष 1980 से 2010) के दौरान होने वाली वष्ा के आधार पर निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 से वर्ष 2017 के बीच यानी12 वर्षो में औसत वष्ा 912 मिलीमीटर हुई है। इसमें भी मात्र तीन वर्ष 1000 मिलमीटर वष्ा हुई है, जबकि शेष वर्षो में 800 मिलीमीटर ही वष्ा हुई है। उन्होंने कहा कि भारत में पूर्वी राज्यों का ग्लोबल वार्मिंग में बहुत कम योगदान है, उसमें भी बिहार बहुत पीछे है, लेकिन पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ से होने वाले दुष्परिणाम को बिहार भुगत रहा है। कॉन्क्लेव को केंद्रीय मंत्री वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, छतीसगढ़ के वन, विधि एवं विधायी कार्यमंत्री महेश गागड़ा और वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव त्रिपुरारी शरण ने भी संबोधित किया।

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