अगड़ों को आरक्षण का मुद्दा विप में गिरा

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पटना – किसी भी धर्म की अगड़ी जाति को आरक्षण का लाभ दिये जाने का मामला बिहार विधान परिषद् में बहुमत से गिर गया। इसकी मांग सदस्य संजीव श्याम सिंह ने की थी। प्रभारी मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दे सकती है। अगड़े को आरक्षण देने का काम केंद्र सरकार कर सकती है। बेहतर होगा कि सदस्य इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठायें। विधान परिषद सदस्य के इस मामले को संकल्प के तहत उठाया था। प्रभारी मंत्री के जवाब के बाद भी संकल्प वापस नहीं लेने पर उप सभापति मोहम्मद हारुण रशीद ने वोटिंग करा दी जो बहुमत से गिर गया।सदस्य संजीव श्याम सिंह ने कहा था कि आज के समय में अगड़ी जाति के लोगों को भी आरक्षण की जरूरत है। इसकी मांग गुजरात सहित कई राज्यों में उठी है और उसे उचित भी बताया गया है। उन्होंने कहा कि आज से 70 साल पहले अगड़ों को आरक्षण की जरूरत नहीं थी। पर आज के समय में 25 से 30 फीसदी अगड़े भूमिहीन हो गये हैं। इस वजह से उनकी शैक्षणिक स्तर गिर गया है। संविधान ने सभी को समानता का अधिकार दिया है। सरकार को चाहिए कि वह उसका पालन करते हुये अगड़ी जातियों को भी आरक्षण दे।सदस्य सिंह ने आगे कहा कि जब बिहार झारखंड एक था तो उस समय सात फीसदी आरक्षण अनुसूचित जनजाति को दिया जाता था। झारखंड अलग होने के बाद अनुसूचित जनजाति का आरक्षण एक फीसदी कर दिया गया। शेष छह फीसदी आरक्षण सरकार अगड़ी जाति को दे सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई पिछड़ी जातियों को अति पिछड़ा वर्ग में शामिल किया है। कई जातियों को जनजाति में भी जोड़ा है। इसी तरह से सरकार अगड़ों को भी आरक्षण देने के लिए कोई प्रावधान करे। उप सभापति ने कहा कि प्रभारी मंत्री ने 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं होने की बात कही है। साथ ही कहा है कि यह मामला केंद्र सरकार के अधीन है। आप संकल्प वापस लें या वोटिंग करा दें। सदस्य ने कहा कि वोटिंग करा दीजिये। उप सभापति ने वोटिंग करा दी तो यह मुद्दा बहुमत से गिर गया।

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