अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस :मजदूरों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

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मजदूरों का न तो निबंधन हो रहा है और न ही उन्हें किसी तरह की सुविधा उपलब्ध है। यह बात बिहार प्रवासी मजदूर फोरम के संयोजक चंद्रभूषण ने कही। मजदूर दिवस पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पटना और जहानाबाद जिले के 78 प्रतिशत घरों से कोई न कोई काम के लिए पलायन कर रहा है। इन दोनों जिलों में सुबह प्रति दिन मजदूरों का मेला लगता है, लेकिन वहां पर न तो शेड है और न ही शौचालय या पेयजल की व्यवस्था। मजदूरों का निबंधन भी नहीं हो रहा है। सभी जगह मजदूरों से आठ की जगह 12 घंटे काम लिया जाता है। सेमिनार में पटना, काको, घोसी, मोदनगंज, हुलासगंज, जहानाबाद आदि इलाकों के मजदूरों ने भाग लिया। सेमिनार को रामाश्रय बिंद, संतोष कुमार, रून्ती कुमारी, गंजा कुमारी, रेणु कुमारी, गायत्री कुमारी, सव्या कुमारी, राधेश्याम रजक, गौतम चंद रविदास आदि ने भी संबोधित किया। मजदूर हित की योजनाएं धरातल पर नहीं दिखतीपटना। मजदूर हित की अनके योजनाएं आज भी धरातल पर नहीं दिखती हैं। पेंशन योजना, छात्र योजना धरातल पर पूरी तरह से नहीं उतरी हैं। यह बात मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर आश्रय अभियान के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था की अध्यक्ष सिस्टर डॉरोथी फर्नाडिस ने कहा। आईएमए हॉल में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने पहली बार मजदूरों का पंजीयन कर योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल की लेकिन अभी भी कई योजनाएं धरातल पर नहीं दिखती। एनयूएलएम योजना के तहत अभी तक मजदूरों के एक भी अड्डे पर बुनियादी सुविधा प्राप्त नहीं है। मुख्य अतिथि विधायक संजीव चौरसिया ने मजदूरों के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर प्रकाश डाला जबकि कार्यक्रम का संचालन करते हुए दिलीप कुमार पटेल ने मजदूर दिवस के इतिहास और इसके औचित्य पर प्रकाश डाला।

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राज्यपाल लाल जी टंडन ने ‘‘मई दिवस’ के अवसर पर बिहार राज्य एवं देश के सभी श्रमिक भाई-बहनों को शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल श्री टंडन ने कहा है कि राष्ट्र के निर्माण एवं विकास में श्रमिकों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण रही है। उनकी मेहनत एवं ताकत से ही हम पूरे देश एवं बिहार राज्य में भी आधारभूत सुविधाओं एवं चौमुखी विकास का स्वप्न जमीन पर उतार पा रहे हैं। राज्यपाल ने कहा है कि श्रमिकों के सशक्तीकरण एवं उनके अधिकारों का सदुपयोग सुनिश्चित कराने के लिए श्रम-कानूनों तथा श्रम-कल्याण की योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सतत प्रयास किये जा रहे हैं। राज्यपाल ने समस्त श्रमिकों एवं उनके पारिवारिक-जन के सुखमय एवं मंगलमय भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की है।

एक मई को दुनिया के कई देशों में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस (International Labour Day 2019) मनाया जाता है। इन दिन को लेबर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है। ये दिन पूरी तरह श्रमिकों को समर्पित है। इस दिन भारत समेत कई देशों में मजदूरों की उपलब्धियों को और देश के विकास में उनके योगदान को सलाम किया जाता है। ये दिन मजदूरों के सम्मान, उनकी एकता और उनके हक के समर्थन में मनाया जाता है। इस दिन दुनिया के 80 से अधिक देशों में छुट्टी होती है। इस मौके पर मजदूर संगठनों से जुड़े लोग रैली व सभाओं का आयोजन करते हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज भी बुलंद करते हैं। यहां जानें मजदूर दिवस या मई दिवस से जुड़ी 5 खास बातें –

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1. कैसे और क्यों हुई शुरुआत
अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत एक मई 1886 को अमेरिका में एक आंदोलन से हुई थी। इस आंदोलन के दौरान अमेरिका में मजदूर काम करने के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किए जाने को लेकर आंदोलन पर चले गए थे। 1 मई, 1886 के दिन मजदूर लोग रोजाना 15-15 घंटे काम कराए जाने और शोषण के खिलाफ पूरे अमेरिका में सड़कों पर उतर आए थे। इस दौरान कुछ मजदूरों पर पुलिस ने गोली चला दी थी जिसमें कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की दूसरी बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें यह ऐलान किया गया कि 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों और श्रमिकों का अवकाश रहेगा। इसी के साथ भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में काम के लिए 8 घंटे निर्धारित करने की नींव पड़ी।

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2. भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत चेन्नई में 1 मई 1923 में हुई। भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में इसकी शुरुआत की थी।

3. आज ही के दिन दुनिया के मजदूरों के अनिश्चित काम के घंटों को 8 घंटे में तब्दील किया गया था। मजदूर वर्ग इस दिन पर बड़ी-बड़ी रैलियों व कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (ILO) द्वारा इस दिन सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। कई देशों में मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की जाती है। टीवी, अखबार, और रेडियो जैसे प्रसार माध्यमों द्वारा मजदूर जागृति के लिए कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं।

4. भारत में लेबर डे को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, मई दिवस, कामगार दिन, इंटरनेशनल वर्कर डे, वर्कर डे भी कहा जाता है।

5. अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 2019 की थीम ‘सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए मजदूर वर्ग एक हो’ है।

 

 

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