अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भारत की बड़ी जीत, कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक

0
69

कुलभूषण जाधव मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत की बड़ी जीत हुई है। आईसीजे की एक अधिकारी के मुताबिक भारत को बड़ी जीत मिली है। कोर्ट ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही उनको काउंसर एक्सेस की सुविधा भी मिलेगी। बता दें कि कुलभूषण जाधव पर 15-1 से भारत के पक्ष में फैसला आया है। 16 में से 15 जजों ने भारत के हक में फैसला सुनाया है।
आईसीजे की कानूनी सलाहकार रीमा ओमेर ने ट्वीट किया है कि जाधव को काउंसलर एक्सेस मिलेगा। कोर्ट ने फैसले पर पुनर्विचार के लिए कहा है।
बता दें कि 16 अप्रैल 1970 में महाराष्ट्र के सांगली में जन्मे कुलभूषण जाधव उर्फ़ हुसैन मुबारक पटेल भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिसे पाकिस्तानी सेना ने 3 मार्च 2016 को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार कर लिया था। पाकिस्तान के मुताबिक जाधव भारत के नागरिक होने के साथ भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के कर्मचारी हैं लेकिन भारत का कहना है कि नौसेना से रिटायर होने के बाद कुलभूषण जाधव ने ईरान में अपना कारोबार शुरू किया था। पाकिस्तान का कहना है कि 29 मार्च 2016 को उसने कुलभूषण को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया जबकि भारत का कहना है कि कुलभूषण को ईरान से गिरफ्तार किया गया।

यह भी पढ़े  जम्मू कश्मीर से 370 हटाने का विरोध करने वाले ब्रिटिश सांसद से मिले कांग्रेसी नेता, BJP ने मांगा जवाब

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से जुड़े मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस(आईसीजे) बुधवार को अपना फैसला सुना दिया. अदालत ने जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगाते हुए पाकिस्‍तान को उसकी सजा की समीक्षा करने का निर्देश दिया है. अदालत ने जाधव को काउंसिलर एक्‍सेस मुहैया कराने को भी कहा है. पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत द्वारा जाधव को मौत की सजा सुनाने जाने के मामले को भारत ने आईसीजे में चुनौती दी थी. पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में बंद कमरे में सुनवाई के बाद जासूसी और आतंकवाद के आरोपों में भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (49) को मौत की सजा सुनाई थी. उनकी सजा पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.

कुलभूषण जाधव मामले से जुड़ी बड़ी बातें
अदालत ने जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगाते हुए पाकिस्‍तान को उसकी सजा की समीक्षा करने का निर्देश दिया है. अदालत ने जाधव को काउंसिलर एक्‍सेस मुहैया कराने को भी कहा है.
पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षाबलों ने जाधव को तीन मार्च, 2016 को बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था जहां वह ईरान से कथित रूप से घुस गये थे.
भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया जहां वह नौसना से सेवानिवृत्ति के बाद अपने कारोबार के सिलसिले में गये थे.
पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में बंद कमरे में सुनवाई के बाद जासूसी और आतंकवाद के आरोपों में भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (49) को मौत की सजा सुनाई थी.
पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा जाधव को मौत की सजा सुनाने जाने के मामले को भारत ने 8 मई 2017 को आईसीजे में चुनौती दी थी.
आईसीजे की दस सदस्यीय पीठ ने 18 मई 2017 को पाकिस्तान को जाधव की मौत की सजा पर अमल से रोक दिया था. मामले की कार्यवाही पूरी होने में दो साल और दो महीने का वक्त लगा.
इस मामले में भारत का पक्ष रखने वाले हरीश साल्वे ने पाकिस्तान की कुख्यात सैन्य अदालतों के कामकाज पर सवाल उठाए थे और इंटरनेशनल कोर्ट में दबाव वाले कबूलनामे पर आधारित जाधव की मौत की सजा निरस्त करने का अनुरोध किया था.
प्रमुख न्यायाधीश यूसुफ की अध्यक्षता वाली आईसीजे की 15 सदस्यीय पीठ ने भारत और पाकिस्तान की मौखिक दलीलें सुनने के बाद 21 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था.
कुछ समय पहले पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को कंसुलर एक्सेस की सुविधा देने की भारत की मांग नहीं मानी थी और कहा था कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लंबित है. (इनपुट: भाषा से भी)

यह भी पढ़े  जिन्ना पर सियासत

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here